जांजगीर-चाम्पा. पौधरोपण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए सीड बॉल एक सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय बनकर सामने आया है. केवल पौधे लगाने तक सिमित न रहें, बल्कि सीड बॉल निर्माण और वितरण के माध्यम से अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास करना चाहिए.
उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित ‘सीड बॉल अभियान’ का शुभारम्भ करते हुए चांपा एसडीएम पवन कोसमा ने व्यक्त किया.

इस अवसर पर तहसीलदार प्रशांत पटेल ने कहा कि सन 1973 से पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और आज बहेराडीह गांव में स्थित देश का पहला किसान स्कूल में विश्व पर्यावरण दिवस को ‘सीड बॉल अभियान’ से जोड़कर अनोखा तरीका से मनाया गया है. इसी तरह बलौदा जनपद के संचार, संकर्म के सभापति चूड़ामणि राठौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है. सिवनी संकुल के शैक्षिक समन्वयक व शिक्षक अशोक तिवारी ने अब तक 100 से से अधिक पौधा लगाने का अपना अनुभव साझा किया.

सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे प्रकृति प्रेमी लोग
किसान स्कूल के अभियान में सिवनी के रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी, धुरकोट की धनबाई राजन, आरसेटी में प्रशिक्षण ले रही बिहान की क़ृषि सखी और पशु सखियों, समूह की महिलाएं, सीड बॉल लेकर पहुंची. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव, रामाधार देवांगन ने बताया कि पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिले में पहली बार सीड बॉल का वितरण लोगों को किसान स्कूल में किया गया और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सभी को शपथ दिलाई गई. आरसेटी के अरुण पाण्डेय ने बताया कि सीड बॉल मिट्टी, गोबर या कम्पोस्ट और बिजों को मिलाकर बनाई गई छोटी गोल गेंद होती है. इन गेंदों को बंजर भूमि,, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों के किनारे या खाली स्थानों पर फेंका जा सकता है. वर्षा होने पर बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेता है. इस विधि में गड्ढा खोदने या विशेष देखभाल की आवश्यकता बहुत कम होती है. इस मौके पर वुशू खिलाड़ी संघ सिवनी की टीम के जनरल सेकेटरी गुलाब चंद यादव, अध्यक्ष प्रीतम दास महंत, व्यवस्थापक अविनाश मांझी, संस्थापक रीता धीवर, उपाध्यक्ष रितिका सिंह, सह सचिव ममता देवांगन और खिलाड़ियों ने मिलकर किसान स्कूल को ब्रम्ह कमल का पौधा भेंट किया.

 

इस अवसर पर मितानिन रामबाई यादव, लक्ष्मीन यादव, भगवती यादव, सक्रिय महिला ललिता यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, आरबीके साधना यादव, कोसमंदा से क़ृषि सखी अंजू साहू, पशु सखी बीना यादव, धुरकोट के क़ृषि सखी धनबाई राजन, सिवनी से क़ृषि सखी रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी समेत सक्ति और स्थानीय जिले के क़ृषि सखी और पशु सखी, मितानिन, अन्य क्रेडर्स और किसान मौजूद थे.

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