जांजगीर-चाम्पा. अमोदा गांव के किसान पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह, जहां किसानों ने डेयरी और वर्मीकम्पोस्ट बनाने का प्रशिक्षण लिया और जैविक पद्धति से उगाई जा रही विभिन्न प्रकार की सब्जियों, फल और फूल की खेती का अवलोकन किया. प्रशिक्षण में किसानों को किसान स्कूल के संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य आरसेटी के कृषि उद्यमी के मास्टर ट्रेनर व असेसर दीनदयाल यादव ने बताया कि डेयरी अर्थात गोपालन से किसान को सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि उनके गोबर और गोमूत्र से दूध से अधिक लाभ कमा सकते हैं। इस कथन को किसान स्कूल में सच साबित कर दिया गया है, जहां गाय के गोबर से बॉयोगैस संयंत्र प्लांट का सफलतापूर्वक संचालन किया हो रहा है. बायोगैस संयंत्र से घर का भोजन पकता है और संयंत्र से निकलने वाले गोबर की स्लरी में केचुआ पालन, जैविक खाद और कंडा तैयार किया जा रहा है। तथा गोमूत्र का उपयोग कीटनाशक दवाओं का निर्माण तथा जले हुए कंडे की राख से साथ मिलाकर जैविक खाद और कीटनाशक पॉवडर तैयार किया जा रहा है, वहीं दूध से बनाई जा रही छांछ का उपयोग हरेक फसलों पर जैविक कीटनाशक दवाओं और टॉनिक के रूप में किये जा रहे खेती की मॉडल को किसानों ने अपने नजरों से देखा. ऑस्ट्रेलिया देश से लाई गई आईसिनिया फोटिडा किस्म की केचुआ पालन इकाई को देखकर किसान बहुत प्रभावित हुए. किसानों का मित्र कहे जाने वाले केचुआ का पालन से लेकर उनके देखरेख तथा संरक्षण को लेकर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई. यह प्रशिक्षण तथा कृषक भ्रमण कार्यक्रम द लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया, हील प्रोजेक्ट के सीडीओ मनोज ना द्वारा अमोदा के किसानों को कराया गया.

प्रशिक्षण में सीताराम रोहिदास, विष्णु प्रसाद धीवर, टीकाराम पटेल, पुनिराम नामदेव, रामगोपाल सोनी, फरीद अहमद, सफ़र अली, पुरषोत्तम केंवट, फागुराम केंवट, मोहत सिंह गोंड़, और कीर्तन सिंह गोंड़ आदि किसान शामिल थे. इस दौरान बिहान की पशु सखी श्रीमती पुष्पा यादव और किसान स्कूल के टीम प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.

सारागांव कॉलेज के छात्रों का किसान स्कूल भ्रमण आज
किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि आज गुरुवार 17 अप्रैल को सुबह 10 बजे सारागांव के कॉलेज के छात्र-छात्राएं किसान स्कूल एक दिवसीय भ्रमण के लिए आएंगे और कृषि क्षेत्र हो रहे नवाचार, छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों, संग्रहालय, 6 फीट ऊंचाई की धनिया, मधुमक्खी पालन, डेयरी, जैविक खाद बनाने की इकाई, अंजोला इकाई, वर्मीवाश इकाई, घर की छत पर बागवानी, साग भाजी और फल फूल से निर्मित रंग बिरंगी राखियां तथा केले-अलसी के डंठल से बने कपड़े का अवलोकन करेंगे.

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